Sudarshan News
बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। राज्य में नई सरकार के गठन के साथ ही सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालेंगे। लंबे राजनीतिक सफर के बाद यह उनके करियर का सबसे अहम पड़ाव माना जा रहा है। राजनीतिक विरासत से शुरू हुआ सफर सम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार के जाने-माने और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते रहे हैं। शुरुआती राजनीतिक प्रशिक्षण उन्होंने अपने पिता के सानिध्य में ही प्राप्त किया। दिलचस्प बात यह है कि जिन राजनीतिक धारणाओं और नेताओं का वे आज विरोध करते हैं, उन्हीं के राजनीतिक वातावरण में उन्होंने अपने शुरुआती कदम रखे थे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से की थी। 57 वर्ष की उम्र और पारिवारिक पृष्ठभूमि 16 नवंबर 1968 को जन्मे सम्राट चौधरी की पारिवारिक जड़ें मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़ी हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी समाजवादी विचारधारा के प्रभावशाली नेता रहे हैं, जो कभी लालू प्रसाद यादव के करीबी माने जाते थे। बाद में उन्होंने नीतीश कुमार के साथ राजनीतिक गठजोड़ किया। सम्राट चौधरी विवाहित हैं और उनके एक बेटा तथा एक बेटी हैं। 19 साल की उम्र में मंत्री बनने से लेकर विवादों तक सम्राट चौधरी ने बेहद कम उम्र में राजनीति में बड़ी छलांग लगाई। महज 19 वर्ष की उम्र में वे पहली बार मंत्री बने थे। हालांकि, बाद में उनकी उम्र को लेकर विवाद भी सामने आया और उन्हें पद से हटाया गया। उस समय वे आरजेडी सरकार में कृषि राज्य मंत्री थे। उनके खिलाफ दस्तावेजों में उम्र को लेकर असंगतियों के आरोप भी लगे, जिससे यह मामला और चर्चित हो गया। कहा जाता है कि इस विवाद में फर्जी दस्तावेज और गलत जानकारी देने जैसे आरोप भी शामिल थे। उनकी उम्र को लेकर विवाद तब और गहरा गया जब कई राजनीतिक नेताओं और अधिकारियों ने उनकी पात्रता पर सवाल उठाए। मामले की जांच के आदेश भी दिए गए और रिपोर्ट में सहयोग न करने जैसी बातें सामने आईं। दस्तावेजों में अलग-अलग जगहों पर उम्र को लेकर विरोधाभास पाए जाने का दावा किया गया। सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। वे उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने मंत्री पद से बर्खास्त होने के बाद भी राजनीतिक शिखर तक पहुंचने में सफलता हासिल की। इस तरह उनका सफर भारतीय राजनीति में एक असामान्य उदाहरण माना जाता है। उपमुख्यमंत्री से मुख्यमंत्री तक का ऐतिहासिक सफर वे बिहार के उन नेताओं में शामिल हो गए हैं जो उपमुख्यमंत्री रहने के बाद मुख्यमंत्री बने। इससे पहले यह उपलब्धि केवल कर्पूरी ठाकुर के नाम दर्ज थी। इस सूची में अब सम्राट चौधरी का नाम भी शामिल हो गया है, जिससे उनका राजनीतिक कद और मजबूत हुआ है। अपने राजनीतिक करियर में सम्राट चौधरी ने कई दलों का सफर तय किया। उन्होंने शुरुआत RJD से की, फिर जेडीयू में भी रहे। बाद में वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए और धीरे-धीरे पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए। सम्राट चौधरी अक्सर अपने बयानों, डिग्री को लेकर सवालों और राजनीतिक आरोपों के कारण चर्चा में रहे हैं। कई मौकों पर उनके खिलाफ विपक्षी नेताओं ने तीखे आरोप लगाए। इसके बावजूद उन्होंने लगातार अपने राजनीतिक प्रभाव को मजबूत किया और अंततः मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
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