Rajasthan Patrika
टाकी बॉर्डर से पश्चिम बंगाल के इस आखिरी छोर के आसपास खड़ी ऐतिहासिक हवेलियां खामोश हैं, लेकिन शाम के वक्त जब ऐतिहासिक राजबाड़ी घाट पर सूरज ढलता है तो इछामती नदी के शांत पानी के ऊपर से एक आवाज तैरती हुई आती है। यह बांग्लादेश के सतखिरा जिले के किसी गांव से आने वाली अजान है। कुछ ही पलों में भारत की ओर से मंदिरों के घंटों की आवाज भी हवा में घुल-मिल जाती है। यह दृश्य जितना सुकून देने वाला है, यहां की चुनावी हकीकत उतनी ही बेचैन करने वाली है। यहां सरहदें कंटीली तारों से नहीं, बल्कि लहरों से तय होती हैं और इस बार उन लहरों में ‘संदेशखाली’ का शोर भी समाहित है।
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