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महानगरों की चमक-धमक वाली सोसायटियों की रसोई से लेकर जवेरी बाजार की तंग गलियों तक, आज एक ही चर्चा है 'रिवर्स माइग्रेशन'. नागरिकता छिन जाने और सरकारी योजनाओं से नाम कट जाने के खौफ ने इस पलायन को उस मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां ट्रेन की कन्फर्म टिकट न मिलने पर लोग हजारों किलोमीटर का सफर बसों और ओवरलोडेड जनरल बोगियों में तय करने को मजबूर हैं.
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