Rajasthan Patrika
Pahalgam terror attack anniversary: कश्मीर घाटी की खूबसूरत वादियों में पिछले साल जो खूनी खेल खेला गया, उसके जख्म आज भी ताजा हैं। पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर कश्मीर की प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता और ‘आतंक पीड़ितों के संगठन’ (ATVK) की अध्यक्ष तसलीमा अख्तर का दर्द एक बार फिर छलक उठा है। उन्होंने इस दिल दहला देने वाली घटना को महज एक बुरी याद नहीं, बल्कि कश्मीर के लिए एक ऐसा ‘नासूर’ बताया है, जो कभी भर नहीं सकता। उन्होंने कहा कि पहलगाम में जो हुआ, वह सिर्फ गोलियों की बौछार नहीं थी, बल्कि यह इंसानियत, भाईचारे और शांति पर नफरत का सीधा प्रहार था। गौरतलब है कि 22 अप्रेल 2025 को पहलगाम की मशहूर बैसरन घाटी में आधुनिक हथियारों से लैस आतंककारियों ने 26 मासूमों की बेरहमी से हत्या कर दी थी। तब M4 कार्बाइन और AK-47 जैसे खतरनाक हथियारों के साथ आए आतंकियों ने मुख्य रूप से हिंदू पर्यटकों को निशाना बनाया था। हालांकि, नफरत की इस अंधी आग में एक ईसाई पर्यटक और एक स्थानीय मुस्लिम घोड़े वाले की भी जान चली गई। ध्यान रहे कि सन 2008 के मुंबई हमलों के बाद इसे देश के नागरिकों पर हुआ सबसे घातक आतंकी हमला माना जाता है।
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