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इनपुट- संदीप मिश्रा, लखनऊ राजधानी लखनऊ में परिवहन विभाग में एक बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। बक्शी का तालाब स्थित ऑटोमेटिक टेस्टिंग सेंटर पर एटीएस के अंदर से फिटनेस कराने के बाद निकले वाहन इसकी पूरी हकीकत बयां कर देते हैं। फिटनेस के नाम पर हर रोज प्रमाणपत्र वाहन चालकों को थमा दिए जाते हैं लेकिन वाहन की जर्जर अवस्था इस हीलाहवाली का प्रमाण दे देती है। दरअसल परिवहन विभाग ने करोड़ों की कीमत से ट्रांसपोर्ट नगर स्थित फिटनेस सेंटर पर आईएनसी खोला था। प्राइवेट हाथों में वाहनों का फिटनेस का काम सौंपने के बाद विभाग ने अपने सरकारी फिटनेस सेंटर में ताला डाल दिया। अब बक्शी का तालाब स्थित ऑटोमेटिक टेस्टिंग सेंटर पर वाहनों की फिटनेस होती है। हालांकि यहां पर फिटनेस के बाद भी वाहनों की लाइट टूटी है, रेट्रो रिफ्लेक्टिव टेप उखड़ा हुआ है, वाहन की हालत कंडम है, लेकिन अंदर से वाहन को फिट होने का प्रमाण पत्र सौंप दिया गया। ऐसी कई गाड़ियों को जो अनफिट हैं उन्हें भी हर रोज फिटनेस प्रमाण पत्र दिए जा रहे हैं। एक तरह से यहां पर प्राइवेट फर्म ने रिश्वत दो फिटनेस लो का फार्मूला लागू कर रखा है और विभाग के अधिकारी कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं। हालांकि जब फिटनेस का रियलिटी चेक किया गया तो इसके बाद अब परिवहन विभाग इस मामले की गंभीरता से जांच कराने की बात कह रहा है। बता दें लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर स्थित फिटनेस सेंटर को करोड़ों की लागत से तैयार किया गया। वर्षों तक यहीं पर वाहनों की मशीनों से ही फिटनेस होती रही, लेकिन सरकारी कार्यालय बंद कर प्राइवेटाइजेशन को बढ़ावा देने के लिए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन खोलने का प्लान बनाया गया। अब फिटनेस केंद्र बंद कर बक्शी का तालाब स्थित एटीएस पर ही वाहनों की फिटनेस हो रही है, लेकिन यहां पर हकीकत में मशीन छोड़िए, जेब गर्म करिए और फिटनेस प्रमाण पत्र लीजिए। 13 अप्रैल को बक्शी का तालाब स्थित ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन पर छत्तीसगढ़ में दर्ज सीजी 10 बीडी 6435 नंबर की गाड़ी आती है। इस गाड़ी की हालत देखकर ही लग जाएगा कि यह सड़क पर चलने काबिल भी नहीं बची है। कुछ दिन पहले एक बार इस गाड़ी को मशीनों पर जांचने के बाद फेल किया जाता है और दूसरी बार फिर से स्लॉट लेकर फिटनेस के लिए आने को बोला जाता है। तमाम कमियां होने पर भी फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है। ये खस्ताहाल वाहन वाहन दो साल के लिए फिटनेस प्रमाण पत्र लेकर निकल लेता है। वाहन के आगे के अस्थि पंजर बिखरे हुए हैं, रिफ्लेक्टिव उजड़ा हुआ है।वाहन को पूरी तरह से जंक ने अपनी चपेट में लिया हुआ है। पिछले हिस्से में कोई टेल लाइट या इंडिकेटर भी नहीं है, लेकिन फिर भी यह गाड़ी कागजों में अब पूरी तरह फिट है। इसी तरह 13 अप्रैल को ही UP 32 WN 0469 इलेक्ट्रिक लोडर फिटनेस के लिए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन पर पहुंचता है। बताया जाता है कि इसमें क्या-क्या कमियां है लेकिन इसके बावजूद फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है। वाहन पर साफ तौर पर देखा जा सकता है कि हेडलाइट को टेप के सहारे अटकाया गया है। इसी तरह नंबर प्लेट भी किसी तरह प्लास्टिक की डोर के सहारे रोकी गई है। दोनों वाहनों की हालत खस्ता होने के बावजूद उन्हें फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किया गया जो अपने में ही यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर किस तरह से मशीनों पर इन वाहनों की फिटनेस हो रही है? इन्हें कैसे पास किया जा रहा है। इन वाहनों के चालकों ने कैमरे पर कुछ बोलने से इनकार किया लेकिन यह बताया कि यहां पर ऐसे लोग सक्रिय हैं उन्हें पैसा देकर आराम से फिटनेस हो जाती है। इसी तरह उन्नाव के सोहरामऊ स्थित ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन पर अपनी दो साल पुरानी नई डिजायर गाड़ी UP 35 BT 8361 की फिटनेस कराने उन्नाव के वाहन स्वामी आशीष कुमार गए। उन्होंने आरोप लगाया कि मेरी गाड़ी नई है फिर भी फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने के एवज में ₹5000 मांगे गए। जब मैंने इसका विरोध किया तो कहा गया कि फिटनेस नहीं हो पाएगी। गाड़ी में बताया गया कि प्रदूषण मानक से अधिक उत्सर्जन कर रहा है जिससे फिटनेस में फेल है। आईजीआरएस पर उन्होंने इसकी शिकायत दर्ज कराई। आशीष का कहना है कि सबसे गलत बात तो यह है कि जिसकी गाड़ी होती है उसकी आंखों के सामने आखिर मशीनों पर फिटनेस क्यों नहीं होती है जिससे पता चल सके कि वाकई उसकी गाड़ी में क्या कमी है। एटीएस के अंदर गाड़ी ले जाने पर वहीं के ड्राइवर को गाड़ी सौंपनी पड़ती है फिर अंदर चाहे वह जो भी करे कौन जानता है। इस पूरे मामले पर डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर (लखनऊ जोन) राधेश्याम का कहना है कि ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन का जो रियलिटी चेक किया है उसे संज्ञान में लिया गया है। इस मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी और फर्म पर कड़ी कार्रवाई भी की जाएगी।
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