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डॉलर की मोटी सैलरी छोड़कर जब अदिति द्विवेदी भारत लौटीं, तो उन्हें लगा कि यहां की कमाई 'पॉकेट मनी' जैसी है—लेकिन इसी बदलाव ने उनकी जिंदगी की प्राथमिकताएं बदल दीं. वीजा की टेंशन से दूर, अब वह वर्क-लाइफ बैलेंस को ज्यादा अहम मानती हैं.
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