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उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा का आगाज आज 19 अप्रैल से हो गया है। पवित्र पर्व अक्षय तृतीया के मौके पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इसके साथ ही देशभर से लाखों भक्तों की आस्था से जुड़ी यह आध्यात्मिक यात्रा शुरू हो चुकी है। चारधाम यात्रा के अन्य दो प्रमुख पड़ावों के लिए भी तिथियां निर्धारित हैं। केदारनाथ धाम के द्वार 22 अप्रैल को खोले जाएंगे, जबकि बद्रीनाथ धाम 23 अप्रैल से श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए उपलब्ध होगा। इन दोनों धामों के खुलने के साथ यात्रा अपने पूर्ण स्वरूप में आ जाती है। चारधाम यात्रा को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इन चारों धामों के दर्शन करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह यात्रा मन को शांति देने के साथ-साथ जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भी भरती है। हिमालय की गोद में बसे ये धाम प्राकृतिक सुंदरता और आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हैं। गंगोत्री को मां गंगा का उद्गम स्थान माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा भगीरथ की कठोर तपस्या के बाद गंगा का अवतरण पृथ्वी पर हुआ था। यहां दर्शन करने से जीवन में शुद्धता और पवित्रता आती है। यमुनोत्री धाम मां यमुना का जन्मस्थल माना जाता है। धार्मिक विश्वास है कि यहां पूजा करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और व्यक्ति को लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है। यहां का प्राकृतिक वातावरण भी बेहद आकर्षक है। केदारनाथ धाम भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। ऊंचे पर्वतीय क्षेत्र में स्थित यह धाम कठिन यात्रा के बाद ही पहुंचा जा सकता है। मान्यता है कि यहां दर्शन करने से सभी दुख दूर होते हैं और शिव की कृपा प्राप्त होती है। बद्रीनाथ धाम भगवान विष्णु को समर्पित प्रमुख तीर्थ स्थल है। वैष्णव परंपरा में इसका विशेष स्थान है। कहा जाता है कि यहां दर्शन करने से जीवन के कष्ट समाप्त होते हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
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