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अक्षय तृतीया का पर्व इस वर्ष 19 अप्रैल, रविवार को मनाया जा रहा है। तिथि को लेकर जो संशय था, वह पंचांग के अनुसार स्पष्ट हो गया है कि सूर्योदय के समय तृतीया होने के कारण आज ही यह पर्व मान्य है। हिंदू परंपरा में इसे बेहद शुभ दिन माना जाता है और इस दिन किए गए कार्यों का फल कभी समाप्त नहीं होता। अबूझ मुहूर्त का विशेष महत्व अक्षय तृतीया को “अबूझ मुहूर्त” कहा जाता है, यानी इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से समय देखने की आवश्यकता नहीं होती। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान, निवेश या नया कार्य लंबे समय तक शुभ फल देता है और निरंतर बढ़ता रहता है। इस वर्ष तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10:49 बजे से शुरू होकर 20 अप्रैल की सुबह 7:27 बजे तक रहेगी। इसी कारण पूरा दिन धार्मिक और शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। पूजा के लिए श्रेष्ठ समय विधि-विधान से पूजा करने का सबसे उत्तम समय सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक रहेगा। इस अवधि में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करने से विशेष पुण्य और समृद्धि की प्राप्ति मानी जाती है। खरीदारी का शुभ अवसर अक्षय तृतीया पर सोना-चांदी और अन्य मूल्यवान वस्तुओं की खरीदारी का विशेष महत्व है। इस वर्ष खरीदारी का शुभ समय 19 अप्रैल सुबह 10:49 बजे से लेकर 20 अप्रैल सुबह 3:57 बजे तक रहेगा। लगभग पूरा दिन शुभ कार्यों और खरीदारी के लिए अनुकूल माना गया है। क्या करें इस पावन दिन पर इस दिन सोना-चांदी या आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। नए व्यवसाय या कार्य की शुरुआत भी लाभकारी रहती है। दान-पुण्य जैसे अन्न, जल और वस्त्र का दान विशेष फलदायी माना गया है। साथ ही पूजा और मंत्र जाप करना अत्यंत शुभ होता है। किन बातों से बचना चाहिए अक्षय तृतीया पर नकारात्मक सोच, विवाद और गलत निर्णयों से बचना चाहिए। बिना सोच-समझ के निवेश करना भी उचित नहीं माना जाता। इस दिन सकारात्मक कार्यों पर ध्यान देना ही सबसे लाभकारी माना गया है। इस दिन सोना खरीदने की परंपरा विशेष रूप से लोकप्रिय है, क्योंकि इसे समृद्धि और स्थायित्व का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि हर वर्ष इस अवसर पर बाजारों में रौनक बढ़ जाती है और लोग इसे निवेश के शुभ अवसर के रूप में देखते हैं।
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