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गुरु ग्रंथ साहिब बेअदबी पर सख्त कानून हुआ लागू; दोषियों को होगी आजीवन कारावास और लगेगा 25 लाख का जुर्माना... राज्यपाल ने दी मंजूरी | Collector
गुरु ग्रंथ साहिब बेअदबी पर सख्त कानून हुआ लागू; दोषियों को होगी आजीवन कारावास और लगेगा 25 लाख का जुर्माना... राज्यपाल ने दी मंजूरी
Sudarshan News

गुरु ग्रंथ साहिब बेअदबी पर सख्त कानून हुआ लागू; दोषियों को होगी आजीवन कारावास और लगेगा 25 लाख का जुर्माना... राज्यपाल ने दी मंजूरी

पंजाब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी से जुड़े मामलों पर अब कड़ी कानूनी कार्रवाई का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने विधानसभा से पारित विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिसके बाद यह अब आधिकारिक रूप से कानून बन चुका है। ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਗ੍ਰੰਥ ਸਾਹਿਬ ਜੀ ਦੀ ਬੇਅਦਬੀ ਵਿਰੁੱਧ ਵਿਧਾਨ ਸਭਾ ਵਿੱਚ ਪਾਸ ਕੀਤੇ ਗਏ ਬਿੱਲ ਉੱਤੇ ਮਾਣਯੋਗ ਰਾਜਪਾਲ ਸ੍ਰੀ ਗੁਲਾਬ ਚੰਦ ਕਟਾਰੀਆ ਜੀ ਨੇ ਦਸਤਖ਼ਤ ਕਰ ਦਿੱਤੇ ਹਨ..ਹੁਣ ਇਹ ਬਿੱਲ ਕਾਨੂੰਨ ਬਣ ਗਿਆ ਹੈ..ਮੇਰੇ ਵਰਗੇ ਨਿਮਾਣੇ ਤੋਂ ਇਹ ਸੇਵਾ ਲੈਣ ਲਈ ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਜੀ ਦਾ ਕੋਟਿਨ- ਕੋਟ ਧੰਨਵਾਦ..ਸਮੂਹ ਸੰਗਤ ਦਾ ਸ਼ੁਕਰਾਨਾ.. pic.twitter.com/IaR9IYh4ol — Bhagwant Mann (@BhagwantMann) April 19, 2026 इस कानून की मांग सिख संगत और राज्य सरकार की ओर से काफी समय से की जा रही थी। अब इसके लागू होने के बाद धार्मिक ग्रंथों के अपमान से जुड़े मामलों में सख्त सजा का प्रावधान लागू हो गया है। इसे सरकार और समाज के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस फैसले पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के खिलाफ पारित विधेयक को मंजूरी मिल गई है और अब यह कानून बन चुका है। उन्होंने इसे अपनी सेवा बताते हुए वाहेगुरु का धन्यवाद किया और संगत के प्रति आभार जताया। पंजाब विधानसभा ने हाल ही में इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया था। 13 अप्रैल को पारित इस बिल का उद्देश्य धार्मिक ग्रंथों के अपमान को रोकना और समाज में शांति एवं सद्भाव बनाए रखना है। नए कानून में यह स्पष्ट किया गया है कि ऐसे मामलों की जांच केवल गजटेड अधिकारी या उससे उच्च स्तर के अधिकारी द्वारा ही की जाएगी। इसके अलावा, किसी भी तरह के समझौते या समझौता आधारित निपटारे की अनुमति नहीं होगी। सरकार का कहना है कि यह कानून एक स्पष्ट संदेश देता है कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अपमान को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस फैसले को राज्य में एक ऐतिहासिक और निर्णायक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

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