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पहलगाम हमले का एक साल: इंसानियत पर आतंकियों के वार की टीस नहीं हो रही कम, परिजनों ने यादों के सहारे जीना सीखा | Collector
पहलगाम हमले का एक साल: इंसानियत पर आतंकियों के वार की टीस नहीं हो रही कम, परिजनों ने यादों के सहारे जीना सीखा
Amar Ujala

पहलगाम हमले का एक साल: इंसानियत पर आतंकियों के वार की टीस नहीं हो रही कम, परिजनों ने यादों के सहारे जीना सीखा

22 अप्रैल 2025...स्थान पहलगाम की बायसरन घाटी...हंसते-खिलखिलाते चेहरों से भरा मैदान अचानक चीखों में बदल गया। चार दिन पहले दुल्हन बनी एक बेटी, गोद में पति का सिर लिए पत्थर सी बैठी थी...चारों तरफ 26 लाशें और सन्नाटा...आज भी यह मंजर रूह कंपा देती है।

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