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फिश पॉलिटिक्स असल में 'सांस्कृतिक युद्ध' है. टीएमसी बंगाली अस्मिता का कार्ड खेल रही है, जबकि बीजेपी समावेशी छवि बनाकर 2026 में सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रही है. मछली अब सिर्फ थाली में नहीं, बल्कि वोट बैंक की पॉलिटिक्स में भी है. 23 अप्रैल को वोट डालने के दौरान बांग्ला मतदाताओं के जेहन में मछली का सवाल जरूर उभरेगा.
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