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अरविंद केजरीवाल की सोच को अर्बन नक्सल विचारधारा के रूप में देखा जाता है. जब जेएनयू में नारे लगते थे जैसे 'अफजल हम शर्मिंदा हैं' और 'तेरे कातिल जिंदा हैं', तो यह दर्शाता था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानने के लिए वे तैयार नहीं थे. इस प्रकार की सोच देश के कानूनी आदर्शों के खिलाफ जाती है और यह दर्शाती है कि कुछ समूह न्याय प्रक्रिया को चुनौती देते हैं.
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