Sudarshan News
देवभूमि उत्तराखंड में एक बार फिर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। अक्षय तृतीया के पावन दिन से चारधाम यात्रा की शुरुआत हो चुकी है। सबसे पहले गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोले गए, वहीं अब केदारनाथ धाम के कपाट भी विधिवत पूजा-अर्चना के बाद खोल दिए गए हैं। अब यात्रा का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव बद्रीनाथ धाम है, जिसके कपाट 23 अप्रैल को खुलेंगे। इसके साथ ही चारधाम यात्रा पूरी तरह से सक्रिय हो जाएगी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचेंगे। सज गया है बाबा केदार का धाम...हर हर महादेव..! pic.twitter.com/Na99RbAhJd — Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) April 21, 2026 भव्य सजावट से सजा केदारनाथ धाम केदारनाथ मंदिर को विशेष रूप से सजाया गया था ताकि बाबा के स्वागत में कोई कमी न रहे। मंदिर परिसर को आकर्षक बनाने के लिए लगभग 51 क्विंटल ताजे फूलों का उपयोग किया गया। इस खास अवसर पर देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचे। जैसे ही मंदिर के कपाट खुले, पूरा वातावरण "हर हर महादेव" और "जय केदार" के जयघोष से गूंज उठा। केदारनाथ: 11वां ज्योतिर्लिंग और अद्भुत मान्यता भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में केदारनाथ धाम का विशेष स्थान है, जिसे 11वां ज्योतिर्लिंग माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, साल के छह महीने यहां भक्त भगवान की पूजा करते हैं, जबकि शीतकाल में कपाट बंद होने के बाद देवता स्वयं यहां पूजा करते हैं। सर्दियों में अत्यधिक बर्फबारी के कारण भगवान की पूजा ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में की जाती है। पंच केदार में भी केदारनाथ को प्रमुख स्थान प्राप्त है। पौराणिक कथा से जुड़ा है केदारनाथ धाम केदारनाथ का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है। कथा के अनुसार, पांडव युद्ध के बाद अपने पापों का प्रायश्चित करने के लिए भगवान शिव की तलाश में हिमालय पहुंचे थे। भगवान शिव ने उनसे बचने के लिए बैल का रूप धारण किया, और जिस स्थान पर उनका पृष्ठ भाग प्रकट हुआ, वही स्थान केदारनाथ के रूप में प्रसिद्ध हुआ। यह धाम मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है। बाद में आदि शंकराचार्य ने इस मंदिर का पुनर्निर्माण कराया था।
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