Collector
बंगाल में पहले फेज में रिकॉर्ड 93% मतदान:हिंसा की छिटपुट घटनाएं, भाजपा विधायकों पर हमला; तमिलनाडु में भी पहली बार 85% वोटिंग हुई | Collector
बंगाल में पहले फेज में रिकॉर्ड 93% मतदान:हिंसा की छिटपुट घटनाएं, भाजपा विधायकों पर हमला; तमिलनाडु में भी पहली बार 85% वोटिंग हुई
Dainik Bhaskar

बंगाल में पहले फेज में रिकॉर्ड 93% मतदान:हिंसा की छिटपुट घटनाएं, भाजपा विधायकों पर हमला; तमिलनाडु में भी पहली बार 85% वोटिंग हुई

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए गुरुवार को रिकॉर्ड वोटिंग हुई। बंगाल की 294 में से 152 सीटों पर पहले फेज में 92.72% मतदान हुआ। छिटपुट हिंसक घटनाएं भी हुईं। दो भाजपा विधायकों पर हमला हुआ। तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर 85.14% वोटिंग हुई। दोनों राज्यों में आजादी के बाद अब तक सबसे ज्यादा वोटिंग हुई है। इससे पहले तमिलनाडु में सबसे ज्यादा मतदान 2011 में 78.29% था, जबकि बंगाल में 2011 में 84.72% मतदान दर्ज किया गया था। ममता ने वोटिंग के बाद कहा कि बंगाल की जनता ने SIR के खिलाफ बंपर वोटिंग की है। गृह मंत्री शाह ने कहा कि TMC का सूरज ढल चुका है। इससे पहले असम, केरलम और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को वोटिंग हुई थी। पांचों राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को एकसाथ आएंगे। पूरी खबर पढ़ें… SIR के बाद वोटिंग बढ़ने का ट्रेंड बंगाल और तमिलनाडु में रिकॉर्ड वोटिंग की वजह SIR भी मानी जा रही है। इसी साल 9 अप्रैल को केरल, असम, पुडुचेरी और नवंबर 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव में भी रिकॉर्ड मतदान हुआ था। केरलम में 78.27% वोटिंग के साथ 39 साल का रिकॉर्ड टूटा था। असम में 85.91%, बिहार में 66.90% और पुडुचेरी 89.87% में इतिहास की सबसे ज्यादा वोटिंग हुई। बंगाल-तमिलनाडु की तरह इन राज्यों-केंद्र शासित प्रदेश में SIR हुई है। तमिलनाडु में अब तक 14 बार चुनाव, इस बार रिकॉर्ड वोटिंग बंगाल में MLA की कार तोड़ी; तमिलनाडु में पुलिस को चाकू मारा, 5 घटनाएं मुर्शिदाबाद : भास्कर रिपोर्टर के सामने महज 50 सेकेंड में हिंसा भड़की बंगाल के नौदा में हिंसा के दौरान भास्कर की टीम वहीं मौजूद थी। उनके सामने महज 50 सेकेंड के भीतर हिंसा भड़क उठी। हुमायूं कबीर दैनिक भास्कर के पत्रकार से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘TMC के कार्यकर्ता गुंडागर्दी कर रहे हैं। उनके कार्यकर्ता हमें बूथ के पास नहीं जाने दे रहे हैं। उनके कहने पर पुलिस ने भी हमें रोक लिया।’ हुमायूं इसके विरोध में धरने पर बैठे थे। आसपास भारी संख्या में पुलिस और पैरा मिलिट्री फोर्स तैनात थी। उनके हाथ में डंडे और हथियार थे। हुमायूं कबीर धरना खत्म करने की बात कहकर वहां से निकले, तभी 50 सेकेंड के भीतर हमलावरों ने अचानक एक कार पर लाठी-डंडे से हमला कर दिया। हमला करने वाले लोग कौन थे, कुछ समझ में आ रहा था। थोड़ी देर बाद पता चला कि हुमायूं कबीर के ही काफिले पर ही हमला हुआ है। पुलिस को हालात काबू में करने के लिए हवाई फायरिंग करनी पड़ी। जहां-जहां हुमायूं कबीर गए, वहां-वहां हिंसा भड़की नादौ के बाद हुमायूं कबीर मुर्शिदाबाद में जहां-जहां भी गए, वहां झड़प और हिंसा की घटनाएं हुईं। वोटिंग के दिन शाम 5 बजे हुमायूं रेजीनगर पहुंचे, वहां भी भीड़ ने ‘हुमायूं कबीर गो बैक’ के नारे लगाए। उन्हें BJP का दलाल बताते हुए हंगामा किया। एक्सपर्ट बोले- हिंसा ऐसी नहीं कि सियासी फायदा मिले पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रभाकर मणि के मुताबिक, बंगाल चुनाव में इन छोटी-मोटी हिंसाओं का कोई असर नहीं होगा। उनके मुताबिक पिछले चुनावों में इससे बड़ी घटनाएं होती रही हैं। अगर पॉलिटिकल पार्टियां इसे एजेंडा भी बनाने की कोशिश करेंगी, तो भी कुछ नहीं होगा। न ही किसी पार्टी को इसका सियासी फायदा मिलेगा। क्या BJP इससे फायदा ले पाएगी? इसका जवाब देते हुए सुमन भट्टाचार्य कहते हैं, ‘अगले फेज में BJP टिक ही नहीं पाएगी। आज जहां-जहां भी ज्यादा तनाव हुआ है, वहां BJP से ज्यादा CPM के साथ TMC का विवाद हुआ है। दूसरे फेज में उन सीटों पर चुनाव होने हैं, जहां BJP का कोई वजूद ही नहीं है।’

Go to News Site