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भारत की नई पीढ़ी ने आस्था को नया रूप दिया है. भगवान को मानने के लिए अब सिर्फ धूप-दीपक ही ज़रूरी नहीं, बल्कि कूल रहकर भी अपने धर्म और आस्था को अपनाया जा सकता है. नई पीढ़ी तीर्थस्थलों पर जा रही है लेकिन अपने तरीके से, भगवान से जुड़ने का तरीका भी अपना है. नई पीढ़ी का ये कैसा स्टाइल है और कैसे आस्था को अपनी सुविधा, अपने तरीके से बदला जा रहा है. यहां समझते हैं...
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