NDTV India
भारतीय राजनीति में ‘आया राम‑गया राम’ से शुरू हुआ दलबदल अब ‘थोक दलबदल’ के दौर तक पहुंच गया है. सत्ता की मजबूरियां, टूटती विचारधाराएं और चुनावी गणित इस प्रवृत्ति को बढ़ा रहे हैं. नतीजतन लोकतंत्र, दलों की विश्वसनीयता और विपक्ष की भूमिका पर गहरे सवाल खड़े हो रहे हैं.
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