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सयानी घोष टीएमसी का सिर्फ राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं बल्कि वे बंगाली अस्मिता की सांस्कृतिक प्रतिनिधि के रूप में सामने आईं है. उनके संबोधनों में 'बांग्लार मेये', 'बांग्लार गर्बो' जैसे शब्द बार-बार सुनाई देते हैं. सयानी की कहानी छोटे स्क्रीन से शुरू हुई है. उन्होंने फिल्मों से पहचान बनाई और अब वे बंगाल के राजनीतिक मानचित्र पर उभर रही हैं.
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