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‘प्रलयंकर’ अभ्यास में गरजी ब्रह्मोस; ईस्टर्न कमांड ने दिखाई जबरदस्त ताकत | Collector
‘प्रलयंकर’ अभ्यास में गरजी ब्रह्मोस; ईस्टर्न कमांड ने दिखाई जबरदस्त ताकत
Sudarshan News

‘प्रलयंकर’ अभ्यास में गरजी ब्रह्मोस; ईस्टर्न कमांड ने दिखाई जबरदस्त ताकत

भारतीय सेना ने पूर्वी कमांड क्षेत्र में ‘प्रलयंकर’ नाम का एक बड़ा सैन्य अभ्यास किया, जिसमें ब्रह्मोस मिसाइल की तैनाती और उसकी ताकत का प्रदर्शन किया गया। इस अभ्यास का वीडियो भी जारी किया गया है, जिसमें जमीन से दागी जाने वाली इस मिसाइल की पूरी प्रक्रिया दिखाई गई है। सेना ने बताया कि इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य युद्ध जैसी स्थिति में तेज कार्रवाई, सटीक निशाना और बेहतर समन्वय को मजबूत करना है। इसके जरिए सैनिकों की तैयारी और उनकी प्रतिक्रिया देने की क्षमता को परखा गया। पूर्वी सीमा की संवेदनशील स्थिति को देखते हुए ऐसे अभ्यास और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। “रणे जयः निश्चितः।” Victory in battle is certain. Coordinates locked. #ExercisePralayankar showcases precision, speed and technological prowess of the #IndianArmy . #BrahMos system reaffirms #AtmanirbharBharat 's capabilities and operational readiness. Built for accuracy.… pic.twitter.com/jFSx2KJUxL — ADG PI - INDIAN ARMY (@adgpi) April 29, 2026 ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस के सहयोग से बनाई गई एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इसकी लंबाई लगभग 8.4 मीटर है और इसका वजन करीब 3000 किलोग्राम होता है। इसका व्यास लगभग 0.6 से 0.67 मीटर के बीच है। यह मिसाइल 200 से 300 किलोग्राम तक का वारहेड ले जा सकती है, जिससे यह मजबूत और सुरक्षित सैन्य ठिकानों को भी नष्ट करने में सक्षम है। इसे एक मोबाइल ऑटोनॉमस लॉन्चर से दागा जाता है, जो 12x12 पहियों वाले भारी वाहन पर लगा होता है। एक लॉन्चर में तीन मिसाइलें होती हैं, जिन्हें अलग-अलग लक्ष्यों पर दागा जा सकता है। इसकी रेंज पहले लगभग 290 किलोमीटर थी, जिसे अब बढ़ाकर 450 किलोमीटर से अधिक कर दिया गया है और भविष्य में इसे 800 किलोमीटर तक बढ़ाने की योजना है। इस मिसाइल की गति लगभग 3700 किलोमीटर प्रति घंटा है, जिससे यह बहुत कम समय में लक्ष्य तक पहुंच जाती है। यह कम ऊंचाई पर उड़ान भर सकती है, जिससे इसे रडार से पकड़ना मुश्किल हो जाता है। इसकी उड़ान ऊंचाई लगभग 10 मीटर से 15 किलोमीटर तक हो सकती है। ब्रह्मोस का गाइडेंस सिस्टम इसे बेहद सटीक बनाता है, जिससे यह दुश्मन के कमांड सेंटर, रडार और सैन्य अड्डों को आसानी से नष्ट कर सकती है। प्रलयंकर अभ्यास में इसके सफल प्रदर्शन ने यह दिखाया कि भारतीय सेना आधुनिक तकनीक और मजबूत रक्षा प्रणाली के साथ पूरी तरह तैयार है। यह अभ्यास देश की रक्षा क्षमता को और मजबूत करने का संकेत देता है और यह संदेश देता है कि भारत हर चुनौती से निपटने के लिए तैयार है।

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