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सुप्रीम कोर्ट ने 35 वर्षों से लंबित आपराधिक मामले में पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई रद्द की, ट्रायल में गंभीर देरी को न्याय के खिलाफ माना. मामला 1989 का था जिसमें दंगा, मारपीट, अपमान और रेलवे अधिनियम के तहत आरोप थे, लेकिन अभियोजन पक्ष ने कोई गवाह पेश नहीं किया.
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