NDTV India
भारत में पाश्चात्य नृत्य शैलियों को जिस तरह बढ़ावा मिल रहा है, उसका असर युवाओं पर स्पष्ट दिखाई देता है. वो देख रहे हैं कि शास्त्रीय नृत्य को साधने में लंबा समय और गहन अभ्यास लगता है, जबकि पश्चिमी शैलियों में अपेक्षाकृत कम समय में पहचान और आमदनी के अवसर मिल जाते हैं.
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