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कभी कांपते हाथों से पहली बार लगाई थी लिपस्टिक, अब बन गईं परिवार की रीढ़ | Collector
कभी कांपते हाथों से पहली बार लगाई थी लिपस्टिक, अब बन गईं परिवार की रीढ़
Rajasthan Patrika

कभी कांपते हाथों से पहली बार लगाई थी लिपस्टिक, अब बन गईं परिवार की रीढ़

पहली बार लिपस्टिक हाथ में आई, तो समझ नहीं आया कि इसे लगाते कैसे हैं। पहली बार बिना हिजाब मेहमानों के सामने खड़ी हुईं, तो नजरें झुक गईं। सवाल घर से भी थे और पड़ोस से भी- ‘होटल में क्या बर्तन मांजने जाएगी? लोग क्या कहेंगे?’ लेकिन आज कश्मीर की सर्द हवाओं के बीच एक खामोश इंकलाब की बयार बह रही है। जिन सपनों को समाज ने बंदिशों की बेडिय़ों में कैद करना चाहा, आज वही सपने कश्मीर के हॉस्पिटैलिटी सेक्टर का चेहरा बन रहे हैं। जब प्रोफेशनल डिमांड के अनुरूप इन लड़कियों ने खुद को ‘ग्रूम’ किया, तो विरोध की एक लहर उठी। सोशल मीडिया पर लानतें भेजी गईं, लेकिन इन्होंने अपने ‘हौसले का मेकअप’ नहीं उतरने दिया। आज गुरेज की निशा हों या काजीकुंड की सेहरून- इनकी मुस्कान और शानदार सर्विस का ही जादू था कि सचिन तेंदुलकर भी सपरिवार इनके काम के मुरीद हो गए। यह सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि उस नए कश्मीर का घोषणापत्र है, जहां बेटियां परंपरा की चौखट लांघकर आर्थिक आजादी का नया इतिहास लिख रही हैं।

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