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छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में संकल्प प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देना समय की आवश्यकता है। इससे संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक संतुलित तथा प्रभावी बनेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम देश के विकास को अधिक समावेशी बनाएगा और समाज में समान अवसरों की भावना को मजबूत करेगा। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने भारतीय संस्कृति और परंपरा में नारी के महत्व को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ माता शबरी, मां दंतेश्वरी और मां महामाया की भूमि है, जहां नारी को शक्ति के रूप में पूजा जाता है। उन्होंने शास्त्रों के श्लोक “या देवी सर्वभूतेषु मातृ-रूपेण संस्थिता” का उल्लेख करते हुए कहा कि नारी केवल सम्मान की पात्र नहीं, बल्कि समाज की आधारशिला है। उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती, अवंती बाई, तीजन बाई, उषा बारले, कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स जैसी महान महिलाओं के योगदान को याद करते हुए कहा कि इन विभूतियों ने देश का गौरव बढ़ाया है और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनी हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए लगातार काम कर रही है। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2026 को “महतारी गौरव वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य मातृशक्ति के योगदान को सम्मान देना और उनके विकास को बढ़ावा देना है। उन्होंने बताया कि महिलाओं को स्व-सहायता समूहों, स्वरोजगार योजनाओं, आवास, पेयजल और आर्थिक सहायता के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। पंचायत स्तर पर भी महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से लोकतंत्र और मजबूत हुआ है। अंत में उन्होंने कहा कि मातृशक्ति का सशक्तिकरण ही समाज के समग्र और संतुलित विकास की कुंजी है।
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