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मोहन भागवत ने कहा कि आज आदिवासियों को सामान्य तौर पर देश के लोगों को जो सुविधाएं मिलती हैं, वो उन्हें नहीं मिलती. हमारी संस्कृति जंगलों में है, वहीं वेदों की रचना हुई, अस्मिता वहीं है और बिना इसके देश का अस्तित्व नहीं टिकता.
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