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कल्पना कीजिए एक ऐसे समाज की जहां लाइब्रेरी में धूल जम रही हो और लोगों के हाथों में किताबों की जगह सिर्फ स्मार्टफोन के नोटिफिकेशन हों. यह केवल कल्पना नहीं है बल्कि दुनिया के कई देशों की कड़वी हकीकत बनती जा रही है. एक तरफ दुनिया डिजिटल क्रांति का जश्न मना रही है, तो वहीं दूसरी तरफ कई देशों में किताबों से नाता लगभग टूटता सा दिख रहा है.
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