Sudarshan News
पश्चिम बंगाल की पनिहाटी विधानसभा सीट इस बार चुनावी जंग का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। भारतीय जनता पार्टी ने यहां रत्ना देबनाथ को उम्मीदवार बनाया है, जो शुरुआती मतगणना में बढ़त बनाए हुए हैं। ताजा रुझानों के अनुसार वे करीब 3000 वोटों से आगे चल रही हैं। हालांकि रत्ना देबनाथ आगे हैं, लेकिन मुकाबला अभी भी बेहद करीबी बना हुआ है। तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार तीर्थाकंर लगातार कड़ी टक्कर दे रहे हैं और हर राउंड के साथ अंतर कम होता दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि यह सीट पूरी तरह अनिश्चित बनी हुई है। पनिहाटी सीट इस बार केवल राजनीतिक वजहों से नहीं, बल्कि भावनात्मक कारणों से भी सुर्खियों में है। रत्ना देबनाथ को आरजीकर मामले से जुड़े एक पीड़ित परिवार से आने के कारण जनता के बीच विशेष पहचान मिली है। बीजेपी ने उन्हें मैदान में उतारकर सहानुभूति और न्याय जैसे मुद्दों को केंद्र में रखा है। दूसरी ओर, टीएमसी उम्मीदवार तीर्थाकंर अपने मजबूत संगठन और स्थानीय नेटवर्क के दम पर मुकाबले को बराबरी पर बनाए हुए हैं। पार्टी के परंपरागत वोट बैंक का भी उन्हें समर्थन मिलता दिख रहा है, जिससे चुनावी संघर्ष और दिलचस्प हो गया है। यह मुकाबला सिर्फ एक सीट तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे राज्य की राजनीतिक दिशा के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अगर रत्ना देबनाथ अपनी बढ़त बरकरार रखती हैं, तो यह बीजेपी के लिए बड़ी सफलता होगी। वहीं टीएमसी की वापसी उसके संगठनात्मक प्रभाव को मजबूत साबित करेगी। राज्य के कुल रुझानों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। बीजेपी करीब 141 सीटों पर आगे है, जबकि टीएमसी 135 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। मुकाबला बेहद नजदीकी होता जा रहा है। रुझानों के बीच विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने अपने समर्थकों और विशेष रूप से हिंदू मतदाताओं का धन्यवाद किया है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग चरणों में मुस्लिम और हिंदू बहुल बूथों के कारण बढ़त में बदलाव देखने को मिला है। उनके अनुसार आगे के राउंड में स्थिति फिर से बदल सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें अंतिम मतगणना पर टिकी हुई हैं, जो यह तय करेगी कि पनिहाटी की जनता ने किसे अपना प्रतिनिधि चुना है और इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले का अंतिम परिणाम क्या होगा।a
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