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केरल में पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार का जाना केवल एक चुनावी हार नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति के एक बड़े युग का अंत होगा. साल 2016 से सत्ता में रही यह सरकार देश में कम्युनिस्टों का आखिरी मजबूत गढ़ थी, जो अब ढह चुका है. साल 1977 के बाद यह भारतीय इतिहास में पहली बार हो रहा है जब देश के किसी भी राज्य में कोई कम्युनिस्ट मुख्यमंत्री नहीं होगा.
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