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चुनाव प्रचार में विजय ने खुद को ‘द्रविड़ राजनीति के विकल्प’ के रूप में पेश किया. उन्होंने DMK और BJP दोनों पर तीखे हमले किए. ऐसे में अब किसी भी बड़े दल के साथ जाना उनके उस नैरेटिव को कमजोर कर सकता है, जिसने उन्हें यहां तक पहुंचाया. दूसरी तरफ, अगर वह ‘प्योर’ राजनीति पर टिके रहते हैं और गठबंधन से बचते हैं, तो सत्ता उनसे दूर रह सकती है.
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