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भाजपा ने भवानीपुर को रणनीतिक रूप से प्रतिष्ठा की लड़ाई में बदल दिया और सुवेंदु अधिकारी को मैदान में उतारकर सीधा ममता को चुनौती दी. इसके अलावा SIR भी अहम फैक्टर रहा. रिपोर्ट्स के मुताबिक भवानीपुर में 47 से 51 हजार के बीच वोटर लिस्ट से नाम हटाए गए, जिनमें अल्पसंख्यक और गरीब तबके के वोटरों की हिस्सेदारी ज्यादा मानी जा रही है.
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