Sudarshan News
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में चल रहे ‘सुशासन तिहार’ के दौरान सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला। चांदो, तामेश्वरनगर और आरागाही क्षेत्रों के दौरे पर पहुंचे सांसद ने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। बिजली, पेयजल और राजस्व विभाग से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को तुरंत समाधान के निर्देश दिए। कार्यक्रम में प्रशासनिक सक्रियता के साथ-साथ जनता से जुड़ाव का भी साफ संदेश देखने को मिला। तामेश्वरनगर में आयोजित शिविर के दौरान कार्यक्रम का माहौल उस समय बदल गया जब सांसद चिंतामणि महाराज ने खुद अपने हाथों से झाल-मुड़ी तैयार करनी शुरू कर दी। कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों को उन्होंने यह पारंपरिक स्नैक बनाकर परोसा, जिससे वहां मौजूद लोग हैरान रह गए। इस दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक अनुभव साझा करते हुए बंगाल चुनाव का जिक्र भी किया और बताया कि कैसे वहां झाल-मुड़ी चर्चा में आई थी। कार्यक्रम के दौरान सांसद का अंदाज और भी दिलचस्प हो गया जब उन्होंने चुटीले अंदाज में कहा कि जहां जरूरत होती है, वहां बात अपनी तरह से रखी जाती है। झाल-मुड़ी बनाते हुए उन्होंने हल्के-फुल्के लहजे में कहा कि इसमें मिर्च भी डाली गई है, ताकि जिसे बात चुभनी हो, उसे असर जरूर महसूस हो। उनके इस बयान और जमीनी जुड़ाव की शैली की स्थानीय स्तर पर खूब चर्चा हो रही है, और लोग इसे एक अलग तरह की राजनीतिक शैली के रूप में देख रहे हैं।
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