Rajasthan Patrika
सबरीमला समेत धार्मिक प्रथाओं और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े मामलों पर सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की नौ जजों की संविधान बेंच में गुरुवार को 13वें दिन धर्म, परंपरा और मौलिक अधिकारों के संतुलन पर व्यापक बहस हुई। सुनवाई के दौरान जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की टिप्पणी चर्चा के केंद्र में रही। उन्होंने कहा कि भारत सिर्फ गणराज्य नहीं, बल्कि धर्म से जुड़ी सभ्यता भी है और अदालत को यह तय करते समय बेहद सतर्क रहना होगा कि धार्मिक प्रथाओं की न्यायिक समीक्षा की सीमा क्या हो। बेंच ने दाऊदी बोहरा समुदाय में बहिष्कार की प्रथा, धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक सुधार और व्यक्तिगत गरिमा के अधिकार पर लंबी सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए कि धार्मिक अधिकारों और व्यक्ति के मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन तय करना सबसे कठिन संवैधानिक प्रश्नों में से एक बन चुका है।
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