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राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2024 रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर कई अहम आंकड़े सामने आए हैं। देश की सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य होने के बावजूद यूपी का अपराध दर राष्ट्रीय औसत से कम दर्ज किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, पूरे देश में वर्ष 2024 के दौरान 35 लाख से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हुए, जहां राष्ट्रीय अपराध दर 252.3 रही, वहीं उत्तर प्रदेश का क्राइम रेट 180.2 रिकॉर्ड किया गया। इसी के साथ प्रदेश अपराध दर के मामले में देश में 18वें स्थान पर रहा। हत्या, हत्या के प्रयास, लूट और डकैती जैसे गंभीर अपराधों में भी यूपी की स्थिति कई बड़े राज्यों से बेहतर बताई गई है। खासतौर पर फिरौती के लिए अपहरण और डकैती के मामलों में उत्तर प्रदेश देश में सबसे नीचे यानी 36वें स्थान पर पहुंच गया, जिसे कानून-व्यवस्था में सुधार का बड़ा संकेत माना जा रहा है। महिलाओं की सुरक्षा और अपराधियों को सजा दिलाने के मामले में भी उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों को सजा दिलाने की दर यानी दोषसिद्धि दर 76.6 प्रतिशत रही, जो पूरे देश में सबसे ज्यादा है। इसके मुकाबले कई राज्यों में यह आंकड़ा काफी कम दर्ज किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि तेजी से जांच पूरी करने, समय पर चार्जशीट दाखिल करने और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की वजह से यह सफलता मिली है। महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों में यूपी 17वें स्थान पर रहा, जबकि दुष्कर्म के मामलों में प्रदेश 24वें नंबर पर दर्ज किया गया। कानपुर और लखनऊ जैसे बड़े शहरों में महिलाओं से जुड़े मामलों में चार्जशीट दाखिल करने की दर 80 प्रतिशत से ज्यादा रही, जिसे पुलिस की सक्रियता का परिणाम माना जा रहा है। रिपोर्ट में हत्या के मामलों को लेकर भी उत्तर प्रदेश की स्थिति संतोषजनक बताई गई है। प्रदेश में प्रति एक लाख आबादी पर हत्या की दर 1.3 दर्ज हुई, जो कई राज्यों की तुलना में काफी कम है। सरकार का कहना है कि लगातार पुलिस अभियान, माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से अपराधों पर नियंत्रण संभव हुआ है। जेलों की स्थिति को लेकर भी यूपी को बेहतर राज्यों में गिना गया है। महिला जेलों में अधिभोग दर 36.7 प्रतिशत दर्ज की गई, जिससे महिला कैदियों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। वहीं केंद्रीय जेलों की अधिभोग दर भी कई अन्य राज्यों की तुलना में कम रही। राज्य सरकार ने इन आंकड़ों को अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का परिणाम बताते हुए कहा है कि अपराधियों के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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