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ड्रोन से स्नाइपर तक, ‘सिनबैक्स-II 2026’ में भारत-कंबोडिया सेनाओं का दमदार तालमेल | Collector
ड्रोन से स्नाइपर तक, ‘सिनबैक्स-II 2026’ में भारत-कंबोडिया सेनाओं का दमदार तालमेल
Sudarshan News

ड्रोन से स्नाइपर तक, ‘सिनबैक्स-II 2026’ में भारत-कंबोडिया सेनाओं का दमदार तालमेल

कंबोडिया के कंम्पोंग स्पू प्रांत स्थित कैंप बेसिल सैन्य प्रशिक्षण केंद्र में भारत और कंबोडिया के बीच आयोजित द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास ‘सिनबैक्स-II 2026’ पूरे उत्साह के साथ जारी है। 4 मई से शुरू हुआ यह संयुक्त अभ्यास 17 मई 2026 तक चलेगा। इसमें भारतीय सेना के 120 जवानों के साथ रॉयल कंबोडियन आर्मी के 160 सैनिक भाग ले रहे हैं। भारतीय दल में मुख्य रूप से मराठा लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट के सैनिक शामिल हैं। इस अभ्यास का प्रमुख उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच सामरिक समन्वय बढ़ाना, संयुक्त अभियानों की क्षमता को मजबूत करना और आधुनिक युद्ध रणनीतियों को साझा करना है। यह सैन्य अभ्यास संयुक्त राष्ट्र के अध्याय-7 जनादेश के तहत आयोजित किया जा रहा है, जिसमें शांति स्थापना अभियानों और आतंकवाद-रोधी रणनीतियों पर विशेष फोकस किया गया है। दोनों देशों की सेनाएं अर्ध-शहरी इलाकों में संयुक्त ऑपरेशन की योजना और क्रियान्वयन का प्रशिक्षण ले रही हैं। अभ्यास के दौरान कमांड पोस्ट एक्सरसाइज, फील्ड ट्रेनिंग और विशेष कौशल आधारित गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। सैनिकों को आधुनिक युद्ध परिस्थितियों में तेजी से निर्णय लेने, समन्वित कार्रवाई करने और चुनौतीपूर्ण हालात में मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करने की ट्रेनिंग दी जा रही है। इसके अलावा दोनों सेनाएं अपने-अपने अनुभव साझा कर रही हैं, जिससे भविष्य में संयुक्त अभियानों के दौरान बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सके। सिनबैक्स-II 2026 के दौरान सैनिकों को फायरिंग अभ्यास, ड्रोन संचालन, शहरी युद्ध तकनीक, मोर्टार ड्रिल, स्नाइपर ट्रेनिंग और कॉम्बैट फर्स्ट एड जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियों में प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके साथ ही आपदा राहत और बचाव अभियानों की भी विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि प्राकृतिक आपदाओं या आपात स्थितियों में दोनों सेनाएं मिलकर प्रभावी कार्रवाई कर सकें। अभ्यास में नई पीढ़ी के हथियारों, ड्रोन और मानव रहित निगरानी प्रणालियों का उपयोग भी शामिल है, जिससे सैनिक आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल में दक्ष बन सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभ्यास दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को नई मजबूती देगा और क्षेत्रीय सुरक्षा, शांति तथा स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही, इस तरह के संयुक्त सैन्य अभ्यास सांस्कृतिक समझ और आपसी विश्वास को भी बढ़ाने का काम करते हैं।

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