Sudarshan News
नई दिल्ली में स्थित कर्तव्य भवन-2 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में पश्चिम एशिया में जारी हालात को लेकर गठित अनौपचारिक मंत्रिसमूह (IGoM) की 5वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक में मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संघर्ष की स्थिति का विस्तृत आकलन किया गया और इस बात पर चर्चा हुई कि भारत पर इसके प्रभाव को कैसे न्यूनतम रखा जाए। इसमें कई केंद्रीय मंत्री शामिल हुए, जिनमें ऊर्जा, वित्त, रेल, नागरिक उड्डयन और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने मिलकर देश की तैयारियों और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने पर विचार साझा किए। The 5th meeting of IGoM was held today to review the existing risks to energy supply chains and domestic availability of essential commodities in the wake of the conflict in West Asia. The Government under the leadership of PM Shri @narendramodi has been doing commendable work… pic.twitter.com/L6OG25VJk2 — Rajnath Singh (@rajnathsingh) May 11, 2026 बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। देश के पास वर्तमान में लगभग 60 दिनों का कच्चा तेल, 60 दिनों की प्राकृतिक गैस और 45 दिनों का एलपीजी भंडार मौजूद है, जो किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। इसी कारण सरकार ने ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग और अनावश्यक खपत में कटौती की आवश्यकता पर जोर दिया है, ताकि देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। बैठक में यह भी बताया गया कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत में ईंधन कीमतें स्थिर रखी गई हैं, जबकि कई देशों में 30 से 70 प्रतिशत तक वृद्धि देखी गई है। तेल विपणन कंपनियों पर भारी वित्तीय दबाव के बावजूद उपभोक्ताओं पर बोझ नहीं डाला गया है। इसके साथ ही सरकार ने MSME सेक्टर और उद्योगों को राहत देने के लिए नई क्रेडिट गारंटी योजनाओं और वित्तीय सहायता उपायों की जानकारी दी। खाद उपलब्धता, कृषि उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूत बताया गया, जिससे आने वाले मौसम में किसी तरह की कमी की आशंका नहीं है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बैठक में कहा कि भारत को अब दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करना होगा। उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा, वैकल्पिक ईंधन स्रोतों और ऊर्जा दक्षता तकनीकों को तेजी से अपनाने की आवश्यकता बताई। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए रणनीतिक भंडारण और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन को और मजबूत करना जरूरी है। सरकार का उद्देश्य है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट का असर आम नागरिकों तक न पहुंचे और देश की आर्थिक स्थिरता बनी रहे।
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