Sudarshan News
राजधानी दिल्ली में धार्मिक स्थलों की भूमिका को केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रखते हुए उन्हें समाज सेवा और जनकल्याण के मजबूत केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग तेज हो गई है। इंद्रप्रस्थ प्रांत की विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधु को पत्र भेजकर मंदिरों, गुरुद्वारों, जैन स्थानकों और आर्य समाज मंदिरों के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। परिषद का कहना है कि धार्मिक संस्थाएं समाज में संस्कार, सेवा और सामाजिक एकता को मजबूत करने का कार्य करती हैं, इसलिए सरकार को इनके संरक्षण और सुविधाओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए। विहिप द्वारा चलाए जा रहे ‘मंदिर संपर्क अभियान’ के दौरान विभिन्न मंदिर समितियों और पुजारियों से चर्चा के बाद यह प्रस्ताव तैयार किया गया। परिषद ने सरकार से मांग की है कि धार्मिक स्थलों से जुड़े निर्णयों में पारदर्शिता लाने के लिए ‘रिलीजियस कमेटी’ में विहिप को प्रतिनिधित्व दिया जाए। साथ ही स्थानीय स्तर पर प्रशासन, पुलिस और धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों की समन्वय समितियां गठित हों। विहिप ने मंदिरों और गुरुद्वारों को व्यावसायिक श्रेणी से हटाकर रियायती दरों पर बिजली-पानी उपलब्ध कराने की भी मांग रखी है। इसके अलावा छोटे मंदिरों में सेवा देने वाले पुजारियों और अर्चकों के लिए सम्मानजनक आर्थिक सहायता योजना शुरू करने का सुझाव भी दिया गया है। परिषद ने धार्मिक स्थलों के आसपास सात्विक और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। विहिप ने मांग की है कि सभी धार्मिक स्थलों के 500 मीटर के दायरे में मांस, मदिरा, तंबाकू और नशे से जुड़े उत्पादों की बिक्री और प्रचार पर रोक लगाई जाए। इसके अलावा मंगलवार को होने वाले हनुमान चालीसा पाठ, भंडारे, शोभायात्राओं और कीर्तन के दौरान पुलिस द्वारा यातायात प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की बात कही गई है। विहिप का मानना है कि सरकार, प्रशासन और धार्मिक संगठनों के बेहतर समन्वय से दिल्ली के धार्मिक स्थल समाज निर्माण और जनसेवा में और बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
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