Dainik Bhaskar
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देश में बढ़ते सड़क हादसों को लेकर कहा कि भारत में लेन ड्राइविंग का कोई कॉन्सेप्ट ही नहीं है। यही दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बन रहा है। कोर्ट ने सड़क सुरक्षा को लेकर कई अहम निर्देश भी जारी किए। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट गाड़ियों में व्हीकल लोकेशन ट्रेकिंग डिवाइस (VLTD) और इमरजेंसी पैनिक बटन अनिवार्य रूप से लगाए जाएं। कोर्ट ने कहा कि ये उपकरण खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। केंद्र सरकार ने 2018 में ही यह नियम लागू किया था, लेकिन अब तक केवल करीब 1% वाहनों में ही ये उपकरण लगाए गए हैं। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने 2012 में दायर सर्जन एस. राजशेखरन की जनहित याचिका पर सुनवाई की। याचिका में देशभर में सड़क सुरक्षा नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की गई थी। बिना उपकरण के नहीं मिलेगा फिटनेस सर्टिफिकेट सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि अब कोई भी सार्वजनिक परिवहन वाहन तब तक फिटनेस सर्टिफिकेट या परमिट नहीं पाएगा, जब तक उसमें VLTD और पैनिक बटन नहीं लगे होंगे। कोर्ट ने केंद्र सरकार को वाहन निर्माताओं के साथ बातचीत करने का निर्देश भी दिया, ताकि निर्माण के समय ही ये उपकरण लगाए जाएं। वाहनों की जानकारी वाहन (Vahan) पोर्टल से होगी लिंक बेंच ने कहा कि ट्रैकिंग डिवाइस और उनकी कार्यक्षमता को वाहन (Vahan) डेटाबेस से जोड़ा जाए, ताकि रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सके। पुराने वाहनों में भी यह सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाया जाएगा। स्पीड कंट्रोल डिवाइस पर भी कोर्ट सख्त सुप्रीम कोर्ट ने स्पीड लिमिटिंग डिवाइस (SLD) को लेकर राज्यों की ढिलाई पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि सभी सार्वजनिक परिवहन वाहनों में स्पीड गवर्नर होना जरूरी है। कोर्ट ने राज्यों को अगली सुनवाई तक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया। इसमें Vahan/Parivahan पोर्टल के आंकड़ों के साथ यह बताना होगा कि कितने वाहनों में स्पीड कंट्रोल डिवाइस लगाए गए हैं। रोड सेफ्टी बोर्ड नहीं बनने पर नाराजगी कोर्ट ने यह भी कहा कि पहले के आदेशों के बावजूद अब तक रोड सेफ्टी बोर्ड का गठन नहीं किया गया है। इस पर नाराजगी जताते हुए केंद्र सरकार को अंतिम मौका दिया गया और कहा गया कि तीन महीने के भीतर बोर्ड का गठन किया जाए।
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