Sudarshan News
दिल्ली में एक बार फिर महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में सामने आई घटना ने 2012 के निर्भया कांड की दर्दनाक यादें ताजा कर दी हैं। एक बार फिर चलती बस में महिला के साथ हुई हैवानियत ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। जानकारी के अनुसार, घटना रानीबाग से नांगलोई के बीच करीब 7 किलोमीटर के रूट पर हुई। जिस बस में यह घटना हुई, वह एक प्राइवेट स्लीपर बस थी। हैरानी की बात यह है कि जहां यह अपराध हुआ, वहां से नांगलोई पुलिस स्टेशन की दूरी बहुत कम थी, फिर भी पीड़िता की मदद समय पर नहीं पहुंच सकी। कैसे हुआ पूरा मामला पीड़िता पीतमपुरा की झुग्गियों में रहती है और मंगोलपुरी की एक फैक्ट्री में काम करती है। 11 मई की रात वह रोज की तरह काम से लौट रही थी। सरस्वती विहार के बी-ब्लॉक बस स्टैंड पर वह बस का समय पूछने के लिए रुकी, तभी उसे जबरन बस में खींच लिया गया। इसके बाद आरोपियों ने बस का दरवाजा बंद कर दिया और ड्राइवर को बस चलाने के लिए कहा। चलती बस के अंदर महिला के साथ दो लोगों ने गंभीर अपराध किया। कुछ घंटों बाद आरोपियों ने उसे गंभीर हालत में सड़क किनारे फेंक दिया और फरार हो गए। घटना के बाद पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसमें अपराध की पुष्टि हुई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। पुलिस के मुताबिक, पीड़िता को रानीबाग इलाके से बस में बैठाया गया था और फिर नांगलोई की तरफ ले जाकर वारदात को अंजाम दिया गया। इस मामले में संबंधित थाने में केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। घटना को याद करते हुए पीड़िता ने बताया कि उसने आरोपियों से बार-बार छोड़ देने की गुहार लगाई। उसने अपने बच्चों का हवाला भी दिया, लेकिन आरोपियों ने उसकी एक भी बात नहीं सुनी और वारदात को अंजाम दिया।
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