Sudarshan News
इनपुट- अंशुमान दुबे, लखनऊ मण्डलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में आज मण्डल के सभी जनपदों के विकास कार्यों की प्रगति की मण्डलीय समीक्षा बैठक आयुक्त कक्ष कार्यालय में संपन्न हुई। बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति, समयबद्ध लक्ष्यपूर्ति तथा गुणवत्तापूर्ण कार्यान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में अपर आयुक्त शिवाकांत द्विवेदी, वर्चुअल माध्यम से मण्डल के समस्त जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी सहित संबंधित विभागीय अधिकारीगण उपस्थित रहे। बैठक में अंत्येष्टि स्थल निर्माण योजना की समीक्षा के दौरान मण्डलायुक्त ने पाया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के अंतर्गत मण्डल के जनपद सीतापुर में 01 निर्माण कार्य को छोड़कर अन्य सभी जनपदों में अंत्येष्टि स्थलों के निर्माण कार्य पूर्ण करा लिये गए हैं। इस पर मण्डलायुक्त ने जिला पंचायत राज अधिकारी, सीतापुर को निर्देशित किया कि शेष अवशिष्ट अंत्येष्टि स्थल निर्माण कार्य में आ रही बाधाओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करते हुए कार्य को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण कराया जाए। समीक्षा के दौरान यह भी पाया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत जनपद उन्नाव, सीतापुर एवं लखीमपुर खीरी में अंत्येष्टि स्थल निर्माण कार्यों की प्रगति निर्धारित लक्ष्यों के सापेक्ष संतोषजनक नहीं है। इस पर मण्डलायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्माण कार्यों में आवश्यक तेजी लाई जाए तथा नियमित मॉनिटरिंग करते हुए निर्धारित समयसीमा के भीतर लक्ष्यों की पूर्ति सुनिश्चित कराई जाए। जन सेवा केंद्रों के माध्यम से आमजन को प्रदान की जा रही विभिन्न सेवाओं की समीक्षा के दौरान यह तथ्य संज्ञान में आया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में अनेक ग्राम पंचायतों में संचालित जन सेवा केंद्र पूर्णतः निष्क्रिय स्थिति में हैं तथा उनके माध्यम से कोई भी सेवा प्रदान नहीं की जा रही है। जनपदवार समीक्षा में जनपद सीतापुर की 1220, रायबरेली की 718, लखीमपुर खीरी की 681, हरदोई की 582, उन्नाव की 471 तथा लखनऊ की 292 ग्राम पंचायतों में स्थित जन सेवा केंद्रों द्वारा शून्य सेवाएं दिए जाने की स्थिति पाई गई। मण्डलायुक्त ने संबंधित जनपदों के जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि नए सर्विस प्रोवाइडरों को कांटेक्ट कर सभी निष्क्रिय जन सेवा केंद्रों को अभियान चलाकर तत्काल प्रभाव से क्रियाशील कराया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक केंद्र की भौतिक एवं तकनीकी स्थिति का सत्यापन कर निष्क्रियता के कारणों का विस्तृत परीक्षण किया जाए तथा जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी, उपकरण, विद्युत आपूर्ति अथवा ऑपरेटर की उपलब्धता जैसी समस्याएं हों, उनका प्राथमिकता के आधार पर निराकरण सुनिश्चित कराया जाए। वर्ष 2010-11 से वर्ष 2023-24 तक लंबित ऑडिट प्रस्तरों की समीक्षा करते हुए मण्डलायुक्त द्वारा समस्त जिलाधिकारियों एवं मुख्य विकास अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि नियमित रूप से समीक्षा बैठकें आयोजित कर लंबित प्रकरणों के निस्तारण में तेजी लाई जाए तथा निस्तारण प्रतिशत में सतत वृद्धि सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जिन प्रकरणों में लेखा परीक्षण अधिकारियों के स्तर पर पेंडेंसी है, उनका विस्तृत विश्लेषण कर आवश्यक समन्वय स्थापित करते हुए लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण कराया जाए, जिससे ऑडिट प्रस्तरों के निस्तारण प्रतिशत में प्रभावी सुधार हो सके। जल जीवन मिशन कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान मण्डलायुक्त द्वारा समस्त जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि पाइपलाइन बिछाए जाने के उपरांत कराए गए सड़क रेस्टोरेशन कार्यों का गुणवत्ता आधारित ऑडिट सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि इस हेतु द्विस्तरीय सत्यापन प्रक्रिया अपनाई जाए तथा टीम गठित कर स्थलीय निरीक्षण कराया जाए। उक्त टीम में जनप्रतिनिधियों, ग्राम प्रधानों एवं कोटेदारों को भी सम्मिलित किया जाए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सड़क पुनर्निर्माण/मरम्मत कार्य निर्धारित मानकों एवं गुणवत्ता के अनुरूप कराए गए हैं।
Go to News Site