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यह कहानी सिर्फ कारों, उनके लोहे, इंजन और टायर की नहीं है. यह कहानी है उस जुनून की, जिसे उत्तर भारत अक्सर 'दिखावा' समझकर छोड़ देता है, लेकिन केरल के लिए यह एक आर्ट है, एक संस्कृति है, और अब एक राजनीतिक आंदोलन है. जिसके आगे पहले कांग्रेस और अब UDF सरकार नतमस्तक हैं.
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