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आम आदमी की जेब पर फिर बढ़ा बोझ...! सप्ताह की शुरुआत में फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम; दिल्ली में पेट्रोल ₹102 के पार, कोलकाता में ₹113 पहुंचा भाव | Collector
आम आदमी की जेब पर फिर बढ़ा बोझ...! सप्ताह की शुरुआत में फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम; दिल्ली में पेट्रोल ₹102 के पार, कोलकाता में ₹113 पहुंचा भाव
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आम आदमी की जेब पर फिर बढ़ा बोझ...! सप्ताह की शुरुआत में फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम; दिल्ली में पेट्रोल ₹102 के पार, कोलकाता में ₹113 पहुंचा भाव

देशभर में आम लोगों पर महंगाई का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। सोमवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर इजाफा किया गया। पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये प्रति लीटर जबकि डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। बीते दो सप्ताह के भीतर यह चौथी बार है जब ईंधन की कीमतों में वृद्धि हुई है। नई कीमतों के लागू होने के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। इसके अलावा देश के कई बड़े शहरों में भी ईंधन के दामों में तेजी देखी गई। कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये, मुंबई में 111.21 रुपये और जयपुर में 113.4 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं नोएडा, लखनऊ और चंडीगढ़ जैसे शहरों में भी पेट्रोल 101 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच चुका है। डीजल की कीमतों में भी बड़ा उछाल डीजल के दामों में भी लगातार बढ़ोतरी जारी है। मुंबई में डीजल 97.8 रुपये प्रति लीटर, कोलकाता में 99.8 रुपये और हैदराबाद में 103.8 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। वहीं बेंगलुरु, भुवनेश्वर और पटना जैसे शहरों में भी डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। पिछले सप्ताह भी बढ़े थे दाम इससे पहले शनिवार को भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि की गई थी। उस समय पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ था। इसके साथ ही दिल्ली में सीएनजी की कीमत में भी 1 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। आखिर क्यों बढ़ रहे हैं ईंधन के दाम? विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण कड़ा किए जाने से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। बताया जा रहा है कि कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय से हो रही वृद्धि के बावजूद सरकारी तेल कंपनियां पुराने रेट पर ईंधन बेच रही थीं। इससे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। अनुमान है कि इन कंपनियों को प्रतिदिन 1000 करोड़ रुपये से अधिक का संयुक्त घाटा हो रहा था, जिसके चलते कीमतों में बढ़ोतरी करना जरूरी हो गया।

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