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शादी या 'कत्लगाह'? हम कब तक खोते रहेंगे ट्व‍िशा जैसी काबिल बेट‍ियां | Collector
शादी या 'कत्लगाह'? हम कब तक खोते रहेंगे ट्व‍िशा जैसी काबिल बेट‍ियां
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शादी या 'कत्लगाह'? हम कब तक खोते रहेंगे ट्व‍िशा जैसी काबिल बेट‍ियां

भारतीय समाज में रूढ़िवादी विवाह व्यवस्था के कारण युवा मानसिक घुटन और प्रताड़ना झेल रहे हैं. एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार पारिवारिक कलह महिलाओं के साथ-साथ शादीशुदा पुरुषों की आत्महत्या का भी एक बड़ा कारण बन चुका है.

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