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भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) ने दिल्ली हाई कोर्ट में स्पष्ट किया है कि संविधान का अनुच्छेद 343 संघ की राजभाषा के बारे में है और यह किसी को उर्दू पत्रकारिता प्रवेश परीक्षा देवनागरी लिपि में आयोजित करने का अधिकार नहीं देता. संस्थान ने यह भी कहा कि उर्दू की लिपि देवनागरी नहीं हो सकती और शैक्षणिक संस्थान को अपनी परीक्षाओं के लिए लिपि निर्धारित करने का अधिकार है.
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