Sudarshan News
कर्नाटक की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा दिया गया इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही उनकी अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद भी तत्काल प्रभाव से भंग कर दी गई है। हालांकि नई सरकार के गठन तक सिद्धारमैया कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे। पिछले कुछ दिनों से राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाएं लगातार तेज थीं। इसी बीच कांग्रेस नेतृत्व के निर्देश के बाद सिद्धारमैया ने 28 मई को मुख्यमंत्री पद छोड़ने का फैसला किया। जानकारी के मुताबिक, जब उन्होंने अपना इस्तीफा सौंपा, उस समय राज्यपाल बेंगलुरु में मौजूद नहीं थे। ऐसे में इस्तीफा पहले राजभवन के अधिकारियों को सौंपा गया। इस्तीफे के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए सिद्धारमैया ने साफ कहा कि वे राज्य की राजनीति में सक्रिय बने रहना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव मिला था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। सिद्धारमैया ने कहा, “मैं कर्नाटक की राजनीति में ही काम करना चाहता हूं। राष्ट्रीय राजनीति में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं है। विधायक के रूप में मेरा कार्यकाल अभी बाकी है और मैं जनता के बीच रहकर उनकी सेवा करता रहूंगा।” अब कर्नाटक में नए मुख्यमंत्री को लेकर राजनीतिक हलचल और तेज होने की संभावना है। कांग्रेस नेतृत्व जल्द ही नए चेहरे के नाम पर फैसला ले सकता है। फिलहाल सभी की नजरें पार्टी हाईकमान और आगामी राजनीतिक रणनीति पर टिकी हुई हैं।
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