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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 29 मई 2026 को एक विशेष समारोह में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर आधारित स्मारक पुस्तक का विमोचन किया। इस पुस्तक में इस सैन्य अभियान में शामिल 100 से अधिक अधिकारी, जवान, नौसैनिक और वायुसेना कर्मियों के व्यक्तिगत अनुभवों को दर्ज किया गया है। कार्यक्रम में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी, थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह भी मौजूद रहे। रक्षा मंत्री ने इस पुस्तक को उन जवानों को समर्पित बताया जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को सफल बनाया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक सैन्य अभियान का विवरण नहीं है, बल्कि इसमें सैनिकों की भावना, समर्पण और कठिन परिस्थितियों में लिए गए निर्णयों का वास्तविक चित्रण है। उनके अनुसार, यह पुस्तक आधुनिक युद्ध के उस पहलू को सामने लाती है जिसमें रणनीति, नेतृत्व और साहस मिलकर सफलता में बदल जाते हैं। राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को एक असाधारण उपलब्धि बताया। उनके मुताबिक, इस अभियान के दौरान भारत के दबाव के चलते पाकिस्तान को मात्र चार दिनों में युद्धविराम की ओर झुकना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह अभियान भारत के सैन्य इतिहास में एक अलग स्थान रखता है और पहले हुए युद्धों से कई मायनों में भिन्न है। इस स्मारक ग्रंथ में उन घटनाओं को शामिल किया गया है जो अब तक औपचारिक सैन्य इतिहास में कम ही दिखाई देती थीं। इसमें उन जवानों के अनुभव हैं जो सीमा पर तैनात थे, वायुसेना के पायलट, नौसेना के कर्मी, एयर डिफेंस सिस्टम संभालने वाले विशेषज्ञ और लॉजिस्टिक व मेडिकल टीम के सदस्य शामिल हैं। पुस्तक युद्ध के उस वास्तविक माहौल को दर्शाती है जो केवल रणनीतिक रिपोर्टों में नहीं देखा जाता। इस प्रकाशन में थलसेना, नौसेना और वायुसेना के साथ-साथ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (IDS) और अन्य संयुक्त संगठनों की भूमिका को भी शामिल किया गया है। इसमें ऑपरेशन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण विभागों के योगदान का विस्तार से उल्लेख किया गया है। यह पुस्तक चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के मार्गदर्शन में तैयार की गई है। इसमें तीनों सेनाओं के रणनीतिक संचार, मीडिया और जनसंपर्क विभागों द्वारा जुटाई गई सामग्री का उपयोग किया गया है। इसके प्रकाशन में यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया ने भी सहयोग दिया है। रक्षा मंत्री ने कहा कि इस पुस्तक का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाना नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए प्रेरित करना भी है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे इस पुस्तक से प्रेरणा लें और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।
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