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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी मंदिर में आम लोगों का दर्शन के लिए आना यह साबित नहीं करता कि उसका संचालन करने वाला ट्रस्ट सार्वजनिक धार्मिक ट्रस्ट है. न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार ने श्री राम लक्ष्मण-जानकी विराजमान मंदिर ट्रस्ट को सार्वजनिक ट्रस्ट घोषित करने संबंधी दो याचिकाएं खारिज कर दीं. अदालत ने कहा कि किसी ट्रस्ट की प्रकृति उसके गठन, उद्देश्य, प्रबंधन और दस्तावेजों के आधार पर तय की जाती है, न कि केवल श्रद्धालुओं की आवाजाही के आधार पर.
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