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संभ्रांत परिवारों के ‘प्रोग्रेसिव चोले’ में घुट रहा बेटियों का दम, गाली-गलौज नहीं, अब ‘ड्रेस कोड’ बदलकर आ रही पितृसत्ता? | Collector
संभ्रांत परिवारों के ‘प्रोग्रेसिव चोले’ में घुट रहा बेटियों का दम, गाली-गलौज नहीं, अब ‘ड्रेस कोड’ बदलकर आ रही पितृसत्ता?
Rajasthan Patrika

संभ्रांत परिवारों के ‘प्रोग्रेसिव चोले’ में घुट रहा बेटियों का दम, गाली-गलौज नहीं, अब ‘ड्रेस कोड’ बदलकर आ रही पितृसत्ता?

Corporate Style Dowry Harassment: अब यह धारणा दरकने लगी है नई पीढ़ी दहेज, पितृसत्ता और महिलाओं के प्रति भेदभाव जैसी सामाजिक बुराइयों से मुक्त हो चुकी है। ट्विशा जैसे मामलों ने दिखाया है कि पढ़े-लिखे, आर्थिक रूप से सम्पन्न और खुद को प्रोग्रेसिव बताने वाले परिवारों में भी महिला विरोधी सोच कई रूपों में मौजूद है। फर्क इतना है कि अब इसका चेहरा बदल गया है। दहेज खुले तौर पर नहीं मांगा जाता, बल्कि आलीशान शादी, महंगे उपहार, कार, स्टेटस, सामाजिक प्रतिष्ठा और पारिवारिक अपेक्षाओं के रूप में सामने आता है।

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