Sudarshan News
मुंबई के घाटकोपर के हिंदी हाईस्कूल परिसर में आयोजित पुरुषोत्तम मास विशेष श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का शनिवार, 31 मई को श्रद्धा और उत्साह के साथ समापन हुआ। एक सप्ताह तक चले इस आध्यात्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर कथा श्रवण के माध्यम से आध्यात्मिक ऊर्जा एवं धार्मिक संस्कारों का लाभ प्राप्त किया। घाटकोपर सत्संग मंडल के तत्वावधान में 25 मई 2026 से प्रारंभ हुए इस कार्यक्रम में देश के प्रख्यात संत महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वतीजी महाराज ने अपने प्रेरणादायी प्रवचनों से श्रद्धालुओं को धर्म और जीवन मूल्यों का संदेश दिया। कथा के दौरान स्वामी प्रणवानंद सरस्वती जी महाराज ने श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों की व्याख्या करते हुए कहा कि मनुष्य का जीवन तभी सार्थक बनता है जब उसमें धर्म, सेवा, संस्कार और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना हो। उन्होंने बताया कि शुद्ध आचरण, संतुलित जीवनशैली, ईश्वर भक्ति, दान-पुण्य और अच्छे कर्म व्यक्ति को आत्मिक शांति एवं जीवन में सफलता प्रदान करते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से देव, देश और धर्म के प्रति समर्पित रहने का आह्वान करते हुए कहा कि आध्यात्मिक मूल्यों का पालन वर्तमान समय की आवश्यकता है। इस अवसर पर संत समाज के प्रतिष्ठित सदस्य स्वामी भारतानंद सरस्वती जी की विशेष उपस्थिति ने कार्यक्रम की आध्यात्मिक महत्ता को और अधिक बढ़ा दिया। उनके सान्निध्य में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों ने श्रद्धालुओं को भक्ति और साधना के वातावरण से जोड़ने का कार्य किया। कथा के अंतिम दिवस पर भजन-कीर्तन, सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया। भक्तों ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इन कार्यक्रमों में सहभागिता कर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया। समापन समारोह के दौरान पूरा परिसर धार्मिक उल्लास और भक्तिमय वातावरण से सराबोर दिखाई दिया। अपने अंतिम उद्बोधन में स्वामी प्रणवानंद सरस्वतीजी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल धार्मिक कथा नहीं, बल्कि मानव जीवन को दिशा देने वाला एक दिव्य ज्ञानग्रंथ है। इसके माध्यम से व्यक्ति सेवा, सदाचार, करुणा और ईश्वर भक्ति के मार्ग पर अग्रसर होकर अपने जीवन को सफल बना सकता है। इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में घाटकोपर सत्संग मंडल के शुभचिंतक डॉ. राजेंद्र सिंह, संयोजक महेंद्र उपाध्याय तथा मंडल के पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन का प्रेरणादायी आयोजन बताया। सात दिनों तक चला यह श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव श्रद्धालुओं के लिए आस्था, भक्ति और सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण का एक यादगार अवसर बनकर समाप्त हुआ।
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