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राजनीतिक हस्तक्षेप और साइबर सुरक्षा चिंताओं ने इस विवाद को और गहरा कर दिया है. सीबीएसई की चुप्पी और आधिकारिक जवाबों की कमी से जनता में भरोसे की कमी बढ़ी है. यह मामला केवल एक टेंडर विवाद नहीं, बल्कि सार्वजनिक संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही की बड़ी चुनौती बन गया है.
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