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फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाने वाले गिरोह का शातिर सदस्य गिरफ्तार | Collector
फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाने वाले गिरोह का शातिर सदस्य गिरफ्तार
Sudarshan News

फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाने वाले गिरोह का शातिर सदस्य गिरफ्तार

इनपुट- ज्ञानेश लोहानी, लखनऊ एस०टी०एफ०, उत्तर प्रदेश को अपात्र लोगों को दूसरे की फैमिली आईडी मे ओटीपी बाईपास कर उसमें मेम्बर जोडकर ISA ("Implementation Support Agency") एवं SHA(State Health Agency, PMJY) के माध्यम से आयुष्मान कार्ड Approve कराने एवं उस कार्ड से इलाज कराकर सरकार के राजस्व को भारी क्षति पंहुचाने वाले संगठित गिरोह के सदस्य चकशेरू को लखनऊ से गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त हुई। विशाल विक्रम सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक, एस०टी०एफ०, उ०प्र० के पर्यवेक्षण में मुख्यालय स्थित साइबर टीम द्वारा, कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर सैकड़ों अपात्र व्यक्तियों के आयुष्मान कार्ड बनाने वाले संगठित गिरोह के 02 सदस्यों को दिनांक 17-06-2025 को प्रयागराज से एवं 07 सदस्यों को दिनांक: 24-12-2025 को लखनऊ से गिरफ्तार कर भारी मात्रा में अपात्र लोगों के आयुष्मान कार्ड बरामद कर अभियोग पंजीकृत कराये गये थे। उपरोक्त कम में एस०टी०एफ० मुख्यालय स्थित साइबर टीम द्वारा उक्त गैंग के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के सम्बन्ध में अभिसूचना संकलन की कार्यवाही की जा रही थी। तकनीकी विशेषज्ञता के आधार पर विश्लेषण एवं मुखबिर के माध्यम से सूचना संकलित करते हुए दिनांक 02-06-2025 समय करीब 16.50 बजे एसटीएफ एवं थाना साइबर काइम लखनऊ की संयुक्त टीम द्वारा अभियुक्त उपरोक्त को बुद्धेश्वर लखनऊ से गिरफ्तार किया गया, जिससे उपरोक्त बरामदगी हुई। गिरफ्तार अभियुक्त चक्रशेरू ने पूछताछ में बताया कि 2023 में एसएससी की कोचिंग करने के लिए लखनऊ आया था। इसी बीच मैने नवंबर 2024 में 102 एंबुलेंस के आफिस में गार्ड की नौकरी कर ली। मार्च 2025 में अवी सीएससी में मेरा परिचय अवनीश से हुआ था। यह सीएससी बुद्धेश्वर चौराहे पर थी। यहां पर मैंने अपना आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए केवाईसी करायी थी। पर मेरा कार्ड पेंडिंग चला गया। तब अवनीश ने बताया कि इसको अप्रूव कराना होगा जो मेरा मित्र चंद्रभान वर्मा 700 रुपए में कराएगा। मैंने रुपए दे दिए, अवनीश ने मेरा कार्ड एप्रूव करा दिया और बताया कि चद्रभान किसी भी व्यक्ति का आयुष्मान कार्ड बनवा सकता है। इसके बाद चंद्रभान से बात कराई, चंद्रभान बोला तुम अवनीश की दुकान पर काम कर लो। किसी की आयुष्मान की केवाईसी दोगे तो अप्रूव कराने का मै रू 500 लूंगा। तुम सामने वाले से 700 से 800 रूपये ले लेना। इसके बाद मैं अवनीश के साथ काम करने लगा। अप्रैल 2025 में चंद्रभान ने मुझे विन्ड क्लब न्यू हजरतगंज बुलाया वहां पर मेरी मुलाकात एक साफ्टवेयर डेवलपर से कराई। साफ्टवेयर डेवलपर ने मुझसे बताया कि उसने फर्जी तरीके से फेक आयुष्मान कार्ड बनाने का पोर्टल बनाया है। उसी के पोर्टल का प्रयोग कर चन्द्रभान व गिरोह के अन्य सदस्य फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाने का काम कर रहे है। साफ्टवेयर डेवलपर ने कहा कि मुझसे आईडी ले लो इस आईडी के माध्यम से ऐड मेंबर करने व अप्रूवल करा कर उसने प्रति कार्ड 800 रू का रेट बताया और बताया कि इसमे चंद्रभान अप्रूवल का रुपया लेंगे। इसके बाद मैंने साफ्टवेयर डेवलपर से पोर्टल की आईडी पासवर्ड ले लिया। इसका प्रयोग कर आयुष्मान कार्ड के लिए अपात्र लोगों को दूसरे पात्र लोगों की फैमिली में ऐड किया जाता है। जिसको दूसरे की फैमिली आईडी में ऐड किया जाता है उसके आधार कार्ड पर अंकित पिता का नाम व जिले के अनुसार फैमिली खोजी जाती है। इसके बाद उसको मैचिंग वाली फैमिली में ऐड कर दिया जाता है।

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