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वैदिक ज्योतिष में गुरु ग्रह को सबसे महत्वपूर्ण शुभ ग्रहों में गिना जाता है। ग्रहों की नियमित चाल परिवर्तन प्रक्रिया के तहत गुरु ने अब कर्क राशि में प्रवेश किया है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह गोचर अत्यंत विशेष माना जा रहा है, क्योंकि कर्क गुरु की उच्च राशि है। लगभग 12 वर्षों के अंतराल के बाद गुरु दोबारा इस राशि में पहुंचे हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, गुरु के इस राशि परिवर्तन का प्रभाव व्यक्तिगत जीवन से लेकर देश-दुनिया की परिस्थितियों तक महसूस किया जा सकता है। क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है उच्च का गुरु? ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, शिक्षा, संतान, विवाह, धन, धर्म, भाग्य और दीर्घायु का प्रतिनिधि ग्रह माना गया है। कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है, जिसे गुरु का घनिष्ठ मित्र ग्रह माना जाता है। यही कारण है कि कर्क राशि में गुरु अपनी सर्वश्रेष्ठ स्थिति में माने जाते हैं और इस अवस्था को "उच्च का गुरु" कहा जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, गुरु का यह गोचर व्यापक स्तर पर असर डाल सकता है। आर्थिक गतिविधियों में तेजी देखने को मिल सकती है। सोना-चांदी जैसे कीमती धातुओं के भाव में उतार-चढ़ाव संभव है। इसके अलावा शिक्षा, शोध, अध्यात्म और धार्मिक गतिविधियों के प्रति लोगों की रुचि बढ़ सकती है। किन राशियों को मिल सकता है लाभ? विशेषज्ञों का मानना है कि मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक और मीन राशि के जातकों के लिए यह गोचर सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकता है। करियर, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन में अनुकूल बदलाव देखने को मिल सकते हैं। वहीं मिथुन, धनु और मकर राशि के लोगों को कुछ मामलों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। हालांकि अंतिम परिणाम व्यक्ति की जन्मकुंडली में गुरु की स्थिति पर भी निर्भर करते हैं। कुंडली में कमजोर गुरु होने पर क्या करें? यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर स्थिति में है या प्रतिकूल फल दे रहा है, तो ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार कुछ उपाय अपनाकर गुरु की कृपा प्राप्त करने का प्रयास किया जा सकता है। ये उपाय आने वाले एक वर्ष तक लाभकारी माने जाते हैं। गुरु ग्रह को मजबूत करने के पारंपरिक उपाय गुरुवार का व्रत और पूजा गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की आराधना करें। केले के वृक्ष की पूजा कर घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। पीली वस्तुओं का दान चना दाल, हल्दी, केले या पीले वस्त्र जैसी वस्तुओं का दान जरूरतमंदों अथवा योग्य व्यक्तियों को करना लाभकारी माना गया है। केसर या हल्दी का तिलक प्रतिदिन स्नान के बाद माथे और नाभि पर केसर या हल्दी का तिलक लगाने की परंपरा गुरु ग्रह को मजबूत करने से जुड़ी मानी जाती है। बृहस्पति मंत्र का जाप 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' मंत्र का 108 बार श्रद्धापूर्वक जाप करना शुभ फलदायक माना गया है। बड़ों और गुरुजनों का सम्मान माता-पिता, गुरुजनों, बुजुर्गों तथा विद्वानों का सम्मान और आशीर्वाद प्राप्त करना गुरु की कृपा पाने का सरल और प्रभावी उपाय माना जाता है। ज्योतिषीय बदलावों पर रहेगी सभी की नजर गुरु का कर्क राशि में प्रवेश आने वाले महीनों में विभिन्न राशियों और सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों पर किस प्रकार असर डालता है, इस पर ज्योतिष जगत की विशेष नजर रहेगी। कई लोगों के लिए यह समय नए अवसरों, प्रगति और सकारात्मक बदलावों का संकेत माना जा रहा है।
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