Sudarshan News
बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित एक निजी अस्पताल में लगी आग ने बड़ा हादसा खड़ा कर दिया। अस्पताल के आईसीयू वार्ड में आग लगने के कारण अब तक पांच लोगों की जान जाने की पुष्टि हुई है। घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और मरीजों को तत्काल दूसरे अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया। हादसे पर दुख जताते हुए बिहार सरकार ने मृतकों के परिवारों के लिए आर्थिक मदद की घोषणा की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि इस दुखद घटना में जान गंवाने वाले लोगों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। सीएम ने अपने संदेश में कहा कि राज्य सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है और घायलों के इलाज के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। शॉर्ट सर्किट को माना जा रहा प्रारंभिक वजह प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अस्पताल के आईसीयू में शॉर्ट सर्किट के चलते आग भड़की। उस समय वार्ड में करीब 15 मरीज भर्ती थे। कई मरीजों की स्थिति गंभीर बताई जा रही है, जिसके चलते मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। घटना की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियों की टीम मौके पर पहुंच गई है। अधिकारियों द्वारा आग लगने के कारणों और अस्पताल में सुरक्षा इंतजामों की जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए विस्तृत जांच जारी है। स्वास्थ्य मंत्री ने नहीं दी कोई प्रतिक्रिया हादसे के बाद मीडिया ने स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की। इसी तरह जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी पत्रकारों के सवालों का जवाब देने से परहेज किया। घटना के एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि देर रात करीब तीन बजे आईसीयू की तरफ से धुआं उठता दिखाई दिया। उस समय वह अस्पताल के गेट के पास मौजूद था। उसके अनुसार, आग लगने के दौरान वहां अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षा कर्मी भी मौके पर नजर नहीं आए। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि जब आईसीयू का दरवाजा खोला गया तो अंदर धुएं का घना गुबार था। सांस लेना बेहद मुश्किल हो रहा था। उसने बताया कि उसका एक रिश्तेदार भी उसी वार्ड में भर्ती था, जिसे बाद में सुरक्षित निकालकर दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस दर्दनाक हादसे के बाद अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा मानकों और आपातकालीन व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के पीछे वास्तविक कारण क्या था और कहीं सुरक्षा में लापरवाही तो नहीं बरती गई।
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